दीपिका पादुकोण की दमदार एक्टिंग ओर इमोसनल संबाद के दमदार मिश्रण है … जरुर देखे …

‘नाक नहीं है, कान नहीं है, झूमके कहां लटकाऊंगी’ और ‘कितना अच्छा होता…अगर एसिड बिकता ही नहीं….मिलती ही नहीं…तो फिकता भी नहीं’chhapak review in hindi

मेघना गुलजार ने ‘छपाक (Chhapaak)’ के लिए टॉपिक चुना एसिड अटैक सरवाइवर का और एक्ट्रेस लिया दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) को. उनकी यह दोनों बातें ही फिल्म की यूएसपी बन पड़ी है. सधे हुए डायरेक्शन और अंतहीन पीड़ा की कहानी दिल से लेकर दिमाग तक को जीतने का काम करती है, और एसिड अटैक सरवाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की रियल लाइफ को परदे पर उकेरने में मेघना गुलजार ने कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी है. इस तरह ‘छपाक (Chhapaak)’आज के दौर की एक महत्वपूर्ण फिल्म है.

छपाक’ तेज़ाब की गैर कानूनी बिक्री पर भी सवाल खड़े करती है। मेघना गुलजार ने विषय की गंभीरता को क्लाईमैक्स तक बरकरार रखा है, जो आपको बेचैन कर सकती है.. फिल्म के अंत में जहां आपके चेहरे पर एक मुस्कान बस आ रही होती है

जिंदगी की जरूरतों से लड़ती मालती (दीपिका पादुकोण) असिड अटैक पीड़िता है और एक अच्छी नौकरी की तलाश में है। वह जानती है कि वह मेहनती और प्रतिभावान है, दुनिया मानती है कि वह बहुत कुछ कर सकती है। लेकिन उसे मौका देने से कतराती है। क्यों? क्योंकि उसका चेहरा एसिड फेंके जाने की वजह से विकृत है। वह समाज के खूबसूरती के मापदंड पर खरी नहीं उतरती। ऐसे में उसकी मुलाकात होती है अमोल (विक्रांत मेसी) से, जो पत्रकार से समाज सेवक बन चुका है और एक एनजीओ चलाता है। अमोल की एनजीओ एसिड अटैक पीड़िताओं का इलाज कराती है और बेहतर जिंदगी देने की कोशिश करती है। मालती इस एनजीओ से जुड़ जाती है। साथ ही साथ खुद पर हुए हमले के खिलाफ आवाज उठाती है और बेबाकी से अपनी लड़ाई लड़ती है। वह तेज़ाब बैन कराने के लिए कानून में बदलाव की भी मांग करती है। अपने PIL को लेकर मालती देशभर में चर्चित है। मालती 12वीं की छात्रा रहती है, जब पड़ोस का एक लड़का बशीर खान उसे शादी के लिए प्रपोज करता है। मालती का इंकार सुनते ही वह बदला लेने की ठानता है और एक दिन रास्ते में मालती पर तेज़ाब से हमला कर देता है। एक पल में मालती की ज़िंदगी बदल जाती है। एक हंसती खेलती, सपने देखती लड़की से.. मालती किस तरह एक बिलखती पीड़िता और फिर चुनौतियों का सामना करते करते आत्म विश्वासी और लाखों के लिए प्रेरणा बन जाती है.. यह सफर देखने लायक है

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‘छपाक (Chhapaak)’ की ताकत जहां दिल छू लेने वाली इसकी कहानी है तो इसी इमोशनल कहानी को पॉवरफुल अंदाज में पेश करने वाली दीपिका पादुकोण की एक्टिंग इसकी जान है. दीपिका पादुकोण ने बहुत ही मजबूती के साथ मालती के कैरेक्टर को परदे पर जिया है, और मालती की जिंदगी की हर बारीकी को पकड़ने की कोशिश की है. फिर वह चाहे मालती का दर्द हो, खुशी हो या कोर्ट कचहरी या जिंदगी की जंग हो, हर मोर्चे पर दीपिका पादुकोण ने दिल जीता है. विक्रांत मैसी ने भी सधी हुई एक्टिंग के जरिये दीपिका पादुकोण का अच्छा साथ दिया है.

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छपाक (Chhapaak)’ के दो डायलॉग हैं जिन्हें सुनकर शरीर में सिरहन दौड़ जाती है, ‘नाक नहीं है, कान नहीं है, झूमके कहां लटकाऊंगी’ और ‘कितना अच्छा होता…अगर एसिड बिकता ही नहीं….मिलती ही नहीं…तो फिकता भी नहीं’. इस तरह मेघना गुलजार ने बहुत ही सिंपल अदाज में कहानी को कहा है लेकिन उसके असर को कहीं भी कम नहीं होने दिया है. इस तरह ‘छपाक’ महिलाओं के खिलाफ होने वाले अमानवीय अपराध के ऊपर बुनी गई पॉवरफुल फिल्म है, जिसमें जिंदगी की हकीकत, एक लड़की का संघर्ष, जिंदगी जीने की जिजीविषा और किसी भी हालात के बावजूद अपने दम पर खड़े होने की कहानी है, जिसे देखना जरूर बनता है.

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रेटिंगः 4/5 स्टार
डायरेक्टरः मेघना गुलजार
कलाकारः दीपिका पादुकोण, विक्रांत मैसे और मधुरजीत सर्गी

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